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Ravindra भवन में ‘मृच्छकटिक’ का भव्य मंचन, प्राचीन उज्जयिनी की झलक से दर्शक हुए मंत्रमुग्ध

Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : शुक्रवार को शहर में चल रहे सांस्कृतिक महोत्सव के अंतर्गत रवींद्र भवन में प्रसिद्ध संस्कृत नाटक ‘मृच्छकटिक’ का भव्य मंचन किया गया। प्राचीन नाटककार शूद्रक द्वारा रचित इस ऐतिहासिक नाटक ने दर्शकों को प्राचीन उज्जयिनी की सामाजिक और सांस्कृतिक दुनिया से रूबरू कराया।
टीकम जोशी के निर्देशन में तैयार इस 10-अंकों वाले नाटक ने अपनी सशक्त प्रस्तुति, संवादों और अभिनय के माध्यम से दर्शकों को एक गहन नाट्य अनुभव प्रदान किया। मंचन में रोमांस, राजनीतिक उथल-पुथल और सामाजिक यथार्थ का प्रभावी मिश्रण देखने को मिला, जिसने पूरे कार्यक्रम को बेहद प्रभावशाली बना दिया।
नाटक की कहानी में उस दौर की सामाजिक संरचना और वर्ग व्यवस्था को केंद्र में रखा गया है, जिसमें एक ब्राह्मण, एक व्यापारी और समाज के हाशिए पर रहने वाले लोग एक साथ जुड़ते हैं। कथा के माध्यम से यह दिखाया गया कि कैसे अलग-अलग वर्गों के लोग मिलकर अन्याय और अहंकार पर आधारित सत्ता व्यवस्था के खिलाफ खड़े होते हैं।
Mṛcchakatika की इस प्रस्तुति में सामाजिक एकता, प्रतिरोध और नैतिक साहस जैसे गहरे विषयों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। नाटक ने यह संदेश दिया कि अन्यायपूर्ण व्यवस्था के खिलाफ सामूहिक आवाज और एकजुटता हमेशा परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
प्रदर्शन के दौरान कलाकारों के अभिनय और मंच सज्जा ने दर्शकों को प्राचीन उज्जयिनी की जीवंत अनुभूति कराई। पारंपरिक वेशभूषा, संवाद अदायगी और संगीत ने नाटक को और अधिक प्रभावशाली बनाया, जिससे दर्शक पूरे समय कहानी से जुड़े रहे।
नाटक में दिखाए गए सामाजिक संघर्ष और न्याय की लड़ाई ने आज के समय में भी अपनी प्रासंगिकता साबित की। दर्शकों ने प्रस्तुति को सराहा और कहा कि यह नाटक केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक संदेश देने वाला एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कला प्रेमी, विद्यार्थी और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोग मौजूद रहे। आयोजन का उद्देश्य प्राचीन भारतीय नाट्य परंपरा को पुनर्जीवित करना और युवा पीढ़ी को भारतीय साहित्य और संस्कृति से जोड़ना बताया गया।
कुल मिलाकर, ‘मृच्छकटिक’ का यह मंचन सांस्कृतिक महोत्सव का एक यादगार हिस्सा बन गया, जिसने दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ा और प्राचीन भारतीय नाट्य कला की समृद्ध परंपरा को फिर से जीवंत कर दिया।





